कभी तनहाईमे अकेलेही बैठकर सोचती रहती हूँ
और तनहाईके इन पलोंमे किसीको खोजती रहती हूँ
सारे अपने कहलानेवाले मेरे आसपासही होते है
फिरभी मैं उसकी तलाशमे रहती हूँ जो गुमशुदा है
पलके मूंदकर तुम्हारी राह देखती रहती हूँ
और अपनेही दिलको समझाती रहती हूँ
लेकिन सचमुच छुप जाते हो कही तुम जब..
तुम्हारी सिर्फ आहट सुननेको तरसती हूँ तब..अमिता
Popular Posts
-
पलकों में ये समाये रहते है मन में बसी जो बाते होती है वो बाते हमसे कहते है कुछ मीठे और कुछ नमकीन ये सपने | नींद में ये अपने से बन जा...
-
-
कैसे कोई सहे इतना सारा दर्द.. कोई तो बताये क्यों सहे ये दर्द.. बर्दाश्त की सीमा लाँघता हुआ...
-
आज फिर कुछ पत्तों को ज़मीं पर बरसते देखा फिर शाम के सायेमे गुजरते लम्होंको देखा हवाओं की सरसराहट मे...
-
मन जो माँगता है पाता नहीं.. जिसकी चाह है उसे बोल नहीं सकता मन जो नहीं माँगता वो पाता है ...
-
कभी तनहाईमे अकेलेही बैठकर सोचती रहती हूँ और तनहाईके इन पलोंमे किसीको खोजती रहती हूँ सारे अपने कहलानेवाले मेरे आसपासही होते है फिरभी मैं उ...
-
I reach for a small piece of earth And falling into my hand, It crumbles to dust. I watch as the trees, once so green, Follow suit and Be...
0 comments:
Post a Comment