पलकों में ये समाये रहते है
मन में बसी जो बाते होती है
वो बाते हमसे कहते है
वो बाते हमसे कहते है
कुछ मीठे और कुछ नमकीन ये सपने |
नींद में ये अपने से बन जाते है
और जब ऑंख खुल जाती है
तब ये पराये हो जाते है
कुछ पाकर कुछ हाथों से ओझल होते ये सपने |
सपनो में हम जीते है
सपनोमे जीनाभी ज़रूरी होता है
उन सपनोंको पाना मुश्कील होता है
फिरभी अपने अरमानोंको मंज़िल दिखाते ये सपने |
सपनोंपे अपना हर पल निर्भर ना हो
जो अक्सके बजाय परछाई दिखाए वो दर्पण ना हो
सपने तो सपनेही है जबतक वो पूरे नही होते
कुछ पूरे होते और कुछ खुद से हार जाते ये सपने |
कुछ पाकर कुछ हाथों से ओझल होते ये सपने |
सपनो में हम जीते है
सपनोमे जीनाभी ज़रूरी होता है
उन सपनोंको पाना मुश्कील होता है
फिरभी अपने अरमानोंको मंज़िल दिखाते ये सपने |
सपनोंपे अपना हर पल निर्भर ना हो
जो अक्सके बजाय परछाई दिखाए वो दर्पण ना हो
सपने तो सपनेही है जबतक वो पूरे नही होते
कुछ पूरे होते और कुछ खुद से हार जाते ये सपने |
...अमिता





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