कैसे कोई सहे इतना सारा दर्द..
कोई तो बताये क्यों सहे ये दर्द..
बर्दाश्त की सीमा लाँघता हुआ ये दर्द..
कैसे कोई सहे इतना सारा दर्द...|
मन की चाह्से उठनेवाला ये दर्द....
एक मीठीसी चुभनसा ये दर्द..
काटोपे सोनेका एहसास दिलानेवाल ये दर्द
कैसे कोई सहे इतना सारा दर्द..|
किसीको बतलाया न जाता है ये दर्द..
अपने आप में चुपचाप है ये दर्द....
खामोश रहकर भी एक अफसाना है ये दर्द...
कैसे कोई सहे इतना सारा दर्द....|
इस दर्द का भी अपना एक दर्द है कोई
इस दर्द को भी एक चुभन सी है कोई..
इस दर्द का क्यों कोई हमदर्द नहीं ..
इस चुभन को कैसे सहता होगा ये दर्द...|
इस दर्द की ये पीड़ा कैसे कोई दूर करे
जिस दर्द में सारा आलम खो गया हो
आखिर इस दर्द का क्या इलाज क्या है .
इस दर्द को मिटा सकेंगे लेकिन
इसके निशान कैसे मिटाए..|
....अमिता..




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