कभी तनहाईमे अकेलेही बैठकर सोचती रहती हूँ
और तनहाईके इन पलोंमे किसीको खोजती रहती हूँ
सारे अपने कहलानेवाले मेरे आसपासही होते है
फिरभी मैं उसकी तलाशमे रहती हूँ जो गुमशुदा है
पलके मूंदकर तुम्हारी राह देखती रहती हूँ
और अपनेही दिलको समझाती रहती हूँ
लेकिन सचमुच छुप जाते हो कही तुम जब..
तुम्हारी सिर्फ आहट सुननेको तरसती हूँ तब..अमिता
पलकों में ये समाये रहते है
मन में बसी जो बाते होती है
वो बाते हमसे कहते है
कुछ मीठे और कुछ नमकीन ये सपने |
नींद में ये अपने से बन जाते है
और जब ऑंख खुल जाती है
तब ये पराये हो जाते है
कुछ पाकर कुछ हाथों से ओझल होते ये सपने |
सपनो में हम जीते है
सपनोमे जीनाभी ज़रूरी होता है
उन सपनोंको पाना मुश्कील होता है
फिरभी अपने अरमानोंको मंज़िल दिखाते ये सपने |
सपनोंपे अपना हर पल निर्भर ना हो
जो अक्सके बजाय परछाई दिखाए वो दर्पण ना हो
सपने तो सपनेही है जबतक वो पूरे नही होते
कुछ पूरे होते और कुछ खुद से हार जाते ये सपने |
...अमिता
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